कोन-(मुन्ना लाल जायसवाल)
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स्थानीय चोपन नगर में अवैध अस्पतालों का संचालन बड़े पैमाने पर जारी है। गरुवार को एसीएमओ गुलाब शंकर यादव ने तीन अस्पतालों का निरीक्षण किया, जिसमें हेल्थ केयर हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, निषाद राज हॉस्पिटल और जन सहायता हॉस्पिटल शामिल थे। इस जांच में सभी संचालक रजिस्ट्रेशन होने का दावा तो कर रहे थे, लेकिन कोई भी अस्पताल संचालक वैध कागजात पेश नहीं कर पाया।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैध अस्पताल अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को फ्रेम में लटका कर कार्यालय में लगाते हैं। ऐसे में दस्तावेज न मिलने का कोई भी बहाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। एसीएमओ यादव ने बताया कि उन्होंने 10 अप्रैल को अपनी जिम्मेदारी संभाली है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच बाकी है।
विभागीय अधिकारियों की संभावित मिलीभगत
स्वास्थ्य विभाग ने अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की पहल शुरू कर दी है। अगर समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि विभागीय अधिकारियों की संभावित मिलीभगत से ही ये अवैध अस्पताल फल-फूल रहे हैं। हालाँकि, शिकायतों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई काफी धीमी है।
जांच के दौरान अस्पताल में कोई एमबीबीएस डॉक्टर नहीं
जांच के दौरान निषाद राज अस्पताल में कोई एमबीबीएस डॉक्टर नहीं पाया गया, जबकि एसीएमओ ने स्पष्ट संकेत दिया कि अस्पताल में पूर्णकालिक एमबीबीएस डॉक्टर का होना अनिवार्य है। हेल्थ केयर हॉस्पिटल की स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई। यहाँ न तो फायर एनओसी है, न पर्यावरण एनओसी और न ही सीपीसी, जबकि संचालक द्वारा पेश किए गए रजिस्ट्रेशन पेपर पर हस्ताक्षर भी नहीं थे। यह अस्पताल स्वयं को ट्रामा सेंटर बताता है, लेकिन नुकसानदेह स्थिति यह है कि आवश्यकता के अनुसार डॉक्टर कभी भी उपस्थित नहीं होते।
रजिस्ट्रेशन के कागजात की कोई जानकारी नहीं दी गई
जन सेवा हॉस्पिटल की स्थिति भी सकारात्मक नहीं रही। जांच में वहाँ भी कोई डॉक्टर नहीं मिले और रजिस्ट्रेशन के कागजात की कोई जानकारी नहीं दी गई। एसीएमओ ने सभी तीनों अस्पतालों को तीन दिन का समय दिया है; इस अवधि में वैध दस्तावेज नहीं दिखाए जाने पर न केवल कानूनी कार्रवाई की जाएगी बल्कि भविष्य में इन अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं किया जाएगा।
इन अवैध अस्पतालों से जुड़े एक गंभीर मामले में गड़ईडीह के एक मरीज ने बताया कि हेल्थ केयर एंड ट्रामा सेंटर में गलत इलाज के कारण उनके हाथ की स्थिति इतनी खराब हो गई कि उसे काटने की नौबत आ गई। अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को शिकायत न करने की शर्त पर मुफ्त इलाज की पेशकश की थी।
सूत्रों का कहना है कि निषाद राज अस्पताल का संचालन स्वास्थ्य विभाग से जुगैल थाना क्षेत्र के खरहरा के लिए अनुमति ले कर किया गया है। हालांकि, जांच इस बात की ओर इशारा करती है कि चोपन और खरहरा थाना क्षेत्र में बिना किसी सुरक्षा मानक के इन अस्पतालों का संचालन विभाग की मिलीभगत से हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के लिए यह एक चुनौती बनी हुई है कि कैसे इस गंभीर मुद्दे को सुलझाया जाए और नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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