कोन-(मुन्ना लाल जायसवाल)
मो0-9450990827
कोन ब्लाक के अंतर्गत चांची खुर्द से मुस्लिम खाड़ी को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर निर्माणाधीन पुल इन दिनों गंभीर विवादों में घिर गया है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुल निर्माण में आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों से अवैध रूप से बोल्डर खनन कर उनके उपयोग का आरोप लगाया है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि निर्माण कार्य में मानक के विपरीत घटिया गुणवत्ता की सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे पुल की मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह पुल लोक निर्माण विभाग (PWD) की देखरेख में बनवाया जा रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की ओर से न तो निर्माण स्थल पर नियमित निगरानी की जा रही है और न ही अवैध गतिविधियों पर कोई रोक लगाई जा रही है। आरोप है कि ठेकेदार पूरी तरह मनमानी रवैया अपनाए हुए है और निर्माण संबंधी नियमों, पर्यावरणीय मानकों तथा सुरक्षा मापदंडों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान से बोल्डर निकाले जा रहे हैं, वह पहाड़ी क्षेत्र पहले से ही पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील है। अवैध खनन के कारण पहाड़ों का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे भविष्य में भूस्खलन जैसी घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। इसके बावजूद संबंधित विभाग आंख मूंदे बैठा है।
इस मामले में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद अबरेज ने भी कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा,
“यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकारी परियोजना में इस तरह खुलेआम अवैध खनन किया जा रहा है। पुल निर्माण में जिस प्रकार पहाड़ों से गैरकानूनी ढंग से बोल्डर निकाले जा रहे हैं और घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है, वह सीधे-सीधे जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ है। PWD विभाग की चुप्पी यह दर्शाती है कि या तो अधिकारियों की मिलीभगत है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। यदि समय रहते उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में यह पुल बड़े हादसे का कारण बन सकता है।”
स्थानीय निवासियों का यह भी कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की किसी भी प्रकार की तकनीकी जांच अब तक सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है। न तो सामग्री की टेस्टिंग की जानकारी दी जा रही है और न ही निर्माण की प्रगति को लेकर कोई पारदर्शिता दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की प्रयोगशाला जांच हो तथा दोषी ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।