
कोन-(मुन्ना लाल जायसवाल)
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झारखंड: राज्य में अवैध बालू खनन और परिवहन पर रोक के तमाम दावों के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। खोखा बालू साइड से चांची कला क्षेत्र होते हुए कोन सोनभद्र तक बिना परमिट टीपरों के जरिए खुलेआम बालू की ढुलाई और बिक्री की जा रही है।
सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा खेल दिनदहाड़े चल रहा है, और स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसमें वन विभाग की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों का कहना है कि रोजाना दर्जनों टीपर बिना किसी डर के सड़कों पर फर्राटा भरते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
ग्रामीणों के मुताबिक, संबंधित क्षेत्र वन विभाग के अधीन आता है, इसके बावजूद अवैध बालू लदे वाहन बेखौफ गुजरते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विभाग की जानकारी के बिना यह संभव है, या फिर कहीं न कहीं संरक्षण मिल रहा है?
इस अवैध कारोबार से जहां एक ओर सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है। नदियों और आसपास के इलाकों का संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि वन विभाग या अन्य किसी अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर कब तक संज्ञान लेते हैं और अवैध बालू माफियाओं पर कब तक शिकंजा कस पाता है।