वीर बहादुर सिंह/ सोनभद्र (9616107197) पूर्व में आई आंधी के कारण बिजली व्यवस्था के बिगड़ने की दुहाई देते हुए विद्युत विभाग इतना उदासीन हो गया की पिछले 48 घंटे से लगातार इस चिलचिलाती गर्मी में होना गांव के लोग बिजली आने की उम्मीद लगाए हुए है लेकिन अभी तक केवल एक 11000 का वायर जो कि टूट कर नीचे गिर गया है उसे दुरुस्त नहीं कराया जा सका जिसके लिए ग्रामीणों द्वारा संबंधित लाइनमैन को कई बार फोन किया गया साथ ही संबंधित पसही फीडर के जेई से भी फोन पर वार्ता हुई लेकिन केवल आश्वासन मिलता रहा की शाम तक विद्युत व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ और ना तो मौके पर कोई लाइनमैन पहुंचा और न हीं शाम होते-होते जेई महोदय से फोन पर वार्ता हो पाई क्योंकि जेई महोदय का फोन स्विच ऑफ हो गया और जब एक्सियन महोदय से बात करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल बराबर रिंग करता रहा लेकिन उन्होंने फोन रिसीव करने की जहमत तक नहीं उठाई! और यही रवैया रहा तो अगले 24 घंटे या उसके बाद 48 घंटे और अभी कहां नहीं जा सकता कुछ की कितना समय और आगे गांव की जनता को इस गर्मी में पीने के पानी,गर्मी और अंधेरे को झेलना पड़ेगा और उसे एक बिजली के तार को जोड़कर उसे पूरे गांव को अंधेरे से मुक्त हमारा बिजली विभाग कब कर पता है यह देखने वाली बात है लेकिन इस रवैया के कारण गांव की जनता आक्रोशित है उनके मन में बिजली विभाग के संबंधित जेई, लाइनमैन सबके खिलाफ मन में एक आक्रोश व्याप्त हो गया है यह सिलसिला केवल एक बार का ही नहीं है हमेशा का है कहीं पेड़ गिरने या हल्की सी आंधी में तार टूटने या कहीं थोड़ा सा कोई पेट टच भी कर रहा है तो उसे समस्या को हल किए बिना संबंधित लाइनमैन द्वारा गांव के पहले से जम्फर को खोल दिया जाता है जैसे गांव में किसी भी व्यक्ति के द्वारा जैसे बिजली का बिल जमा ही नहीं किया जाता उन्हें बिजली की कोई आवश्यकता ही नहीं है यह सोचा जाता है जबकि होना यह चाहिए कि ग्रामीणों के सहयोग से बिजली के तारों को ठीक कर जैसे सभी जगह की विद्युत बहाली की जाती है उस गांव की भी बिजली को बहाल किया जाए लेकिन संबंधित लाइनमैन के द्वारा ऐसा नहीं किया जाता पिछली बार भी कई बार ऐसा हो चुका है जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने जब उच्च अधिकारियों से की थी तब लाइनमैन के द्वारा बिजली जाकर बनाई गई थी लेकिन उन लोगों का यह कहना है कि अब चाहे 11000 का तार हो चाहे एलटी हो चाहे कोई समस्या हो अगर यह पार्टिकुलर किसी एक गांव के लिए है तो उन्हें अलग से सुविधा शुल्क चाहिए बिना सुविधा शुल्क के वह काम करने को तैयार नहीं और जब जेई महोदय से इस बारे में कहा जाता है तो केवल आश्वासन मिलता है या फिर चुप्पी साध ली जाती है उन लोगों के द्वारा रही सही कसर ऑनलाइन कंप्लेंट के द्वारा पूरी कर दी जाती है अगर ग्रामीणों द्वारा 1912 पर शिकायत भी की गई तो उस पर भी कोई उचित कार्रवाई नहीं की जाती क्योंकि उसका निस्तारण घर बैठे अधिकारियों द्वारा कर दिया जाता है और मौके पर समस्याएं जस के तस बनी रहती है ग्रामीणों ने मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी को जाहिर करते हुए उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस गांव की बिजली को जल्द ही बहाल कराई जाय।
