कोन-(मुन्ना लाल जायसवाल)
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– सीएचसी कोन में है डाक्टर व अन्य स्टाफ की कमी
कोन(सोनभद्र)।प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोन को सीएचसी में तब्दील हुए लगभग एक साल बीत गए। लेकिन सुविधा नहीं बदली है। 30 बेडों वाले इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड व एक्सरे उपलब्ध नहीं है। मानव संसाधन की भी भारी कमी है। जिसमें डॉक्टर,ड्रेसर और स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं। सीएचसी में 30 बेड के साथ प्रसूता गृह, जांच घर, दवा आदि की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
सीएचसी कोन पर करीब एक लाख की आबादी के इलाज का जिम्मा है।झारखण्ड सीमा के कई गांवों के लोग भी इलाज कराने के लिए सीएचसी कोन में आते हैं। सीएचसी में औसतन 50 से 70 रोगी प्रतिदिन इलाज के लिए आते हैं। जबकि शनिवार तथा मंगलवार को रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। अस्पताल में इलाज कराने आए रोगियों को अस्पताल से दवा दी जाती है। चिकित्सक द्वारा वही दवाइयां लिखी जाती है जो अस्पताल में उपलब्ध हो। कई बार इलाज करवाने आए रोगियों की मांग पर चिकित्सक बाहर की दवाइयां भी लिखते हैं।
सीएचसी में मरीजों की सुविधा के लिए सहायक उपकरण पर्याप्त नहीं है और न ही पर्याप्त चिकित्सक नहीं है। गंभीर प्रकृति के मामले आने पर जिला चिकित्सालय में रेफर कर दिया जाता है। इसके कारण घायल मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। डाक्टरों और स्टाफ की कमी के कारण लोगों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। यहां तक कि सीएचसी में इमरजेंसी सेवाएं नहीं मिल पा रही है और ना ही जांच हो पा रही है। महिला डाक्टर न होने से गर्भवती महिलाओ को जिला अस्पताल या निजी क्लिनिक का चक्कर काटना पड़ रहा है।
