कोन-(मुन्ना लाल जायसवाल)
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कोन(सोनभद्र)।कोन ब्लॉक के स्थानीय कोन लैम्प्स पर किसानों की उम्मीदें टूट गईं। टोकन मिलने के बावजूद खाद न मिलने की घटना ने सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का आरोप है कि “खाद का पूरा खेल पहले से तय था—बोरियाँ चुनिंदा लोगों तक पहुँच गईं, और आम किसान को सिर्फ़ टोकन की पर्ची थमा दी गई।” बता दे कि सोमवार को सुबह से कतारों में खड़े किसानों ने जब खाली हाथ लौटना पड़ा, तो गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना है कि टोकन बाँटने का नाटक केवल भीड़ को काबू में रखने और समय बिताने का तरीका था। किसानों का कहना था कि किन किसानों को खाद मिली उनकी सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।काँग्रेस कमेटी ब्लाक अध्यक्ष मदन गुप्ता का कहना है कि खाद वितरण की पूरी प्रक्रिया में लैम्प्स सचिव और लैम्प्स अध्यक्ष की मनमानी चली। टोकन सीरियल नम्बर से बाँटे गए, लेकिन वितरण उसी हिसाब से नहीं हुआ। कई किसानों को टोकन के बावजूद खाद नहीं मिला, जबकि कुछ चुनिंदा लोगों को प्राथमिकता देकर बोरी थमा दी गई।
किसान कर्ज़ और महंगे दामों पर खाद खरीदने की मजबूरी में और गहरे संकट में फँस सकते हैं
यह घटना केवल कोन ब्लॉक की नहीं है। आसपास के क्षेत्रों से भी हर साल ऐसी शिकायतें आती हैं। किसान चंदन,रमेश,सुरेश का मानना है कि जब तक स्टॉक और वितरण की पूरी सूची ऑनलाइन व नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक नहीं की जाएगी, तब तक ऐसे विवाद और गड़बड़ियाँ खत्म होना मुश्किल है।
