कोन-(मुन्ना लाल जायसवाल)
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कोन (सोनभद्र)।आदर्श रामलीला कमेटी, चांची कला द्वारा आयोजित रामलीला का मंचन इस वर्ष भी पूरे भक्ति, भव्यता और सांस्कृतिक गौरव के साथ जारी है। धार्मिक आस्था और ग्रामीण संस्कृति का यह संगम संपूर्ण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
आयोजन के अध्यक्ष अनिल चतुर्वेदी और निर्देशक सुशील चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में रामलीला को एक जीवंत और सरस रूप प्रदान किया जा रहा है।मंचन के व्यास नवनीत चतुर्वेदी अपनी ओजस्वी वाणी, प्रभावशाली कथावाचन और भावपूर्ण प्रस्तुति से प्रतिदिन दर्शकों को भक्ति रस में डुबो रहे हैं। उनकी वाणी में ऐसा आकर्षण है कि श्रोता भावविभोर हो जाते हैं।
वे अपनी स्पष्ट उच्चारण शैली, गूढ़ व्याख्या और भावनात्मक अभिव्यक्ति के साथ कथा को इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं कि श्रद्धालु स्वयं को त्रेतायुग में उपस्थित अनुभव करते हैं। उनकी कथावाचक शैली को कोन क्षेत्र में विशेष सम्मान प्राप्त है, और वे रामकथा के माध्यम से जनमानस में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को जीवंत रूप दे रहे हैं।
अब तक हुए प्रमुख प्रसंगों का मंचन
बीते दिनों ‘नारद मोह’, ‘रावण अत्याचार’, ‘राम जन्म’ और ‘तड़का वध’ जैसे प्रमुख प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इन प्रसंगों में संवाद अदायगी, मंच सज्जा, संगीत और प्रकाश संयोजन ने भावनात्मक प्रभाव को और गहरा किया।
आज होगा ‘फुलवारी’ प्रसंग का मंचन
आज के कार्यक्रम में ‘फुलवारी’ प्रसंग का मंचन किया जाएगा। यह दृश्य भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता के बाल्यकाल से जुड़ा एक सुंदर और भावनात्मक प्रसंग है, जिसमें बाल रूप में प्रभु श्रीराम व उनके भाईयों का जनकपुर की फुलवारी में सैर करना और माता सीता से प्रथम भेंट का चित्रण होता है। इस प्रसंग को लेकर श्रद्धालुओं और दर्शकों में विशेष उत्साह है।
आगामी कार्यक्रमों की झलक
रामलीला मंचन के अगले चरणों में जनकपुर आगमन, धनुष यज्ञ, वनवास, सीता हरण और लंका विजय जैसे प्रमुख प्रसंगों का मंचन प्रस्तावित है। आयोजन स्थल को प्रतिदिन सुसज्जित किया जा रहा है और श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
यह रामलीला न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट करती है, बल्कि सांस्कृतिक समरसता, सामाजिक एकता और ग्रामीण लोकसंस्कृति का भी अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। आयोजकों के अथक प्रयासों और दर्शकों की बढ़ती भागीदारी ने इस कार्यक्रम को चांची कला क्षेत्र की एक विशेष पहचान बना दिया है।