कोन-(मुन्ना लाल जायसवाल)
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कोन(सोनभद्र)।कोन क्षेत्र में बिना रजिस्ट्रेशन के कई हास्पिटल, अल्ट्रासाउंड, पैथालाजी सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं। इनके पास न तो प्रशिक्षित चिकित्सक हैं और न ही स्वास्थ्य कर्मी। फिर भी बुखार से लेकर आपरेशन तक का जिम्मा उठाकर मरीजों की जान जोखिम में डालने से नहीं चूकते हैं। ऐसा भी नहीं कि इन अस्पतालों के बारे में विभाग अनभिज्ञ हैं। क्योंकि की इनके बरदहस्त व मेहरबानी के बिना कुछ भी संभव नहीं है। यूं तो जिले में करीब सौ अस्पताल, पैथालाजी सेंटर पंजीकृत हैं। लेकिन इसके अलावा गांव से लेकर शहर तक कुकुरमुत्ते की तरह गली-गली में अस्पताल, पैथालाजी सेंटर व डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित हो रहे हैं और तो और कई ऐसे भी हैं, जो आगे मेडिकल की दुकान चला रहे हैं और पीछे दो कमरों में पूरा नर्सिंग होम संचालित कर रहे हैं। इन अस्पतालों में कोई डिग्री धारक चिकित्सक भी नहीं है। लेकिन हर तरह के मरीजों को भर्ती कर उनका आर्थिक शोषण के अलावा जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इन अस्पतालों पर अक्सर सप्ताह में एक मौत चिकित्सकों की लापरवाही से होने की बात को लेकर विवाद होता है, लेकिन धीरे-धीरे मामला ठंडा हो जाता है। कोन ,कचनरवा,चकरिया, चांचीकला,रामगढ़ व पिण्डारी कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है।