कोन-(मुन्ना लाल जायसवाल)
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– परशुराम की भूमिका में पं. हृषिकेश चौबे ने मोहा दर्शकों का मन
आदर्श रामलीला मंच चांची कला द्वारा आयोजित रामलीला के अंतर्गत दिनांक 22 सितंबर 2025 को भगवान राम के जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रसंग ‘धनुष यज्ञ’ अत्यंत भव्यता और भक्तिपूर्ण वातावरण में मंचित किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय श्रद्धालुओं और दर्शकों की भारी उपस्थिति रही।
शिव धनुष भंग का दृश्य बना आकर्षण का केंद्र
रामायण के इस प्रसंग में भगवान श्रीराम द्वारा जनकपुर में आयोजित यज्ञ में भगवान शिव के धनुष को भंग करने और जनकनंदिनी सीता द्वारा उन्हें वरमाला पहनाने का दृश्य अत्यंत प्रभावशाली रहा। मंचन के दौरान संवाद, भाव-भंगिमा, प्रकाश संयोजन और पारंपरिक वेशभूषा ने दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति कराई।
जनक-लक्ष्मण संवाद ने बढ़ाया मंचन का प्रभाव
धनुष टूटने के पश्चात जनक और लक्ष्मण के मध्य हुआ संवाद दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। लक्ष्मण के उत्साह और वीर रस से ओतप्रोत वचनों के समक्ष जनक की शालीनता, विवेक और सौम्यता ने दृश्य को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया। इस संवाद ने दर्शकों की तालियों और वाह-वाह के साथ भरपूर सराहना प्राप्त की।
परशुराम की भूमिका में पं. हृषिकेश चौबे ने बटोरी सराहना
इस दृश्य में परशुराम की भूमिका में पं. हृषिकेश चौबे ने मंच पर आते ही दर्शकों को अपनी दमदार उपस्थिति से मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके ओजस्वी स्वर, गूंजते संवाद और तेजस्वी भाव-भंगिमा ने परशुराम के क्रोध, धर्मनिष्ठा और गरिमा को सजीव कर दिया। दर्शकों ने बार-बार तालियों के साथ उनकी प्रस्तुति की सराहना की।
संचालन व संयोजन की प्रशंसा
रामलीला का सफल संचालन अध्यक्ष अनिल चतुर्वेदी एवं निर्देशन सुशील चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में किया गया। कथा व्यास नवनीत चतुर्वेदी ने अपनी भावपूर्ण वाणी से प्रसंग की गहराई को उद्घाटित किया।
महंत पं. उपेंद्र नाथ की संपूर्ण देखरेख
महंत पं. उपेंद्र नाथ ने मंच व्यवस्था, पात्र समन्वय और अनुशासन का सुंदर निर्वहन किया। उन्होंने सभी पात्रों की तैयारी का निरीक्षण किया तथा मंचन के पूर्व संपूर्ण व्यवस्थाओं की सुचारू देखरेख कर कार्यक्रम को निर्विघ्न संपन्न कराया।