कोन-(मुन्ना लाल जायसवाल)
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कोन(सोनभद्र)। ओबरा तहसील क्षेत्र के बिल्ली स्थित कृष्णा माइनिंग खदान में शनिवार दोपहर पहाड़ी दरकने से हुए हादसे में अब तक पांच मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि एक और मजदूर के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। 52 घंटे से जारी रेस्क्यू ऑपरेशन अपने अंतिम चरण में है। जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने बताया कि अंतिम शव को भी जल्द बाहर निकालने की कोशिश जारी है।
हादसे के बाद खदान संचालक सहित तीन जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने उनकी तलाश तेज कर दी है। दुर्घटना ने खनिज विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि जिले में सैकड़ों खदानें बिना सुरक्षा मानकों के संचालित हो रही हैं, वहीं अवैध खनन में लगी बड़ी माफिया जमात का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है।
सोमवार को उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष योगेंद्र डिमरी और जिले के प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार खतरा उठाते हुए मलबा हटाने में लगी हैं और जवानों का मनोबल मजबूत है। बरामद सभी शवों को सोनभद्र मोर्चरी में रखा गया है, जबकि एक शव का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
हादसे में कोन थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत पीपरखाड़ के टोला परसवा निवासी 18 वर्षीय रविंद्र कुमार गोंड की भी मौत हो गई। शव गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। ग्राम प्रधान संजय पासवान ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए जिला प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग की। देर शाम पीपरखाड़ में रविंद्र का अंतिम संस्कार कर दिया गया।